कोर्ट ने खारिज की हनीप्रीत की जमानत याचिका, बड़ी मुसीबत

 

कोर्ट ने हिंसा भड़काने और देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रही प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत इंसां की मंगलवार को ट्रांजिट अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट का कहना है कि वह किसी भी तरह के विवेकाधिकार वाली राहत पाने की हकदार नहीं हैं क्योंकि वह डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की 25 अगस्त को दोषसिद्धि के बाद फैली हिंसा के बाद से ही अरेस्ट से बच रही है।

न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल ने कहा कि राम रहीम की दत्तक पुत्री हनीप्रीत का आवेदन सही नहीं है। इसे समय हासिल करने और हरियाणा के पंचकूला की अदालत में चल रही सुनवाई को विलंबित करने के लिए दाखिल किया गया है। अदालत ने गौर किया कि हनीप्रीत ने जांच में शामिल होने या आत्मसमर्पण करने को लेकर प्रतिबद्धता नहीं जताई। वह राम रहीम की दोषसिद्धि के बाद से ही फरार है।

अदालत ने कहा कि राहत के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने में सक्षम होने के लिए गिरफ्तारी से बचाव के लिए उनकी याचिका में दम नहीं है। साथ ही अदालत ने कहा कि हनीप्रीत के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बावजूद उसे गिरफ्तार करने के पुलिस के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला है।

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत देना अदालत का न्यायिक विशेषाधिकार है और इसका इस्तेमाल एहतियात के साथ किया जाना चाहिए और अदालत को संतुष्ट होना है कि आवेदन सही आधार पर दायर किया गया है और अदालत का कृत्रिम तौर पर अधिकार क्षेत्र तैयार करने के लिये आवेदक की तरफ से कोई हेराफेरी नहीं की गई है।

हाईकोर्ट ने इससे पहले 36 वर्षीय हनीप्रीत तथा दिल्ली और हरियाणा पुलिस के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद उनकी जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था।

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