वैश्विक पहचान दिलाने में सूर्यकान्त नागर की कहानियों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता-प्रदीप मिश्र

 

 

इंदौर। हिंदी कहानी अब वैश्विक कहानी के समकक्ष खड़ी हो चुकी है। हिंदी कहानी की विकास यात्रा में यह उपलब्धि हासिल करने में सूर्यकान्त नागर के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। उक्त विचार युवा कवि प्रदीप मिश्र ने जनवादी लेखक संघ इंदौर इकाई द्वारा आयोजि सूर्यकांत नागर एकाग्र में व्यक्य किये। हाल ही साहित्यकार सूर्यकान्त नागर को उनके समग्र साहित्य के अवदान के लिए शाल, स्मृति चिन्ह तथा अभिनन्दन पत्र प्रदान करके सनत कुमार सृजन सम्मान-2017 से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान ख्यात कथाकार द्वय प्रभु जोशी तथा प्रकाशकांत के हाथों दिया गया।

प्रीतम लाल दुआ सभाग्रह में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में चंद्रकांत देवताले को याद करते हुए कवि देवेन्द्र रिणवा ने उनकी एक कविता का पाठ किया। संस्था के सचिव प्रदीप कान्त ने सनत कुमार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे जैसा लिखते थे वैसा ही जीवन जीते थे। उनके स्वप्नों में वैज्ञानिक भारतीय समाज की परिकल्पना थी।

सृजन सम्मान निर्णायक समिति के अध्यक्ष सुरेश उपाध्याय ने अथितियों व श्रोताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मान जनवादी लेखक संघ के पूर्व अध्यक्षों की सृजन परंपरा में लिखने वालों को प्रत्येक वर्ष दिया जाता है। इस क्रम में 2015 में आशा कोटिया सृजन सम्मान वरिष्ठ कवि कृष्णकांत निलोसे तथा 2016 में चिन्तक देवी प्रसाद मौर्य सृजन सम्मान वरिष्ठ कवि एवं नाटककार रतन चौहान को दिया जा चुका है। अभिनन्दन पत्र का वाचन डॉ पद्मा सिंह ने किया।

इस अवसर पर सम्मानित लेखक सूर्यकान्त नागर ने आत्मकथ्य के साथ अपनी बहुचर्चित कहानी तमाचा का पाठ किया। नागर के रचनाकर्म पर चर्चा करते हुए कहानीकार प्रकाशकांत ने कहा कि वे एक सजग रचनाकार हैं और उनकी कहानियों में जीवन के सारे पक्ष शामिल हैं। उनकी छह दशक की रचना यात्रा आश्वस्त करती हैं।

प्रभु जोशी ने कहा कि ऐसे समय में जब सत्ताएं रचना और रचनाकारों को ख़ारिज कर रहीं हैं यह आयोजन महत्वपूर्ण हो जाता है। नागर जी की अधिकांश कहानियां मध्यमवर्ग की हैं जो पाठक को लक्ष्य तक पहुँचाने में सफल हैं। वे सरल एवं सहज भाषा के कथाकार हैं। कार्यक्रम का संचालन चारुशीला मौर्य ने किया व आभार नेहा लिम्बिदिया ने माना। यह जानकारी जनवादी लेखक संघ (इंदौर इकाई) के अध्यक्ष रजनी रमण शर्मा ने दीं।

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